नई दिल्ली — भारत को दुनिया के अग्रणी खेल राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘खेलो इंडिया योजना’ के व्यापक विस्तार और ‘राष्ट्रीय खेल महासंघों’ (ANSFs) की सहायता राशि में अभूतपूर्व वृद्धि को मंज़ूरी दी गई।
वर्ष 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिए स्वीकृत यह एकीकृत योजना ₹36,441 करोड़ के भारी-भरकम वित्तीय परिव्यय के साथ लागू की जाएगी। आज़ादी के बाद से देश के खेल परिदृश्य में यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी खेल विकास कार्यक्रम है।
पिछले बजट से 8 गुना अधिक आवंटन
यह नया बजट आवंटन पिछली खेलो इंडिया योजना की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक है। यह अभूतपूर्व वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार खेल को केवल एक पाठ्येतर गतिविधि न मानकर, राष्ट्र-निर्माण, युवा विकास और राष्ट्रीय गौरव का मुख्य आधार मानती है।
कैबिनेट द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के दूर-दराज के इलाकों, गांवों और छोटे शहरों की छुपी हुई खेल प्रतिभाओं को खोजना और उन्हें विश्वस्तरीय ट्रेनिंग प्रदान करना है।
‘गांव के मैदान से ओलंपिक पोडियम तक’ का रोडमैप
इस पुनर्गठित योजना का ढांचा एक ऐसा निर्बाध (seamless) माध्यम तैयार करता है, जहाँ कोई भी प्रतिभाशाली युवा किसी आर्थिक तंगी, भौगोलिक दूरी या साधनों की कमी के कारण पीछे न छूटे।
योजना को ‘खेलो भारत नीति 2025’ और ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020)’ के दूरदर्शी लक्ष्यों के साथ जोड़ा गया है। इसके तहत:
- शिक्षा और खेल का एकीकरण: ‘खेलो इंडिया फीडर स्कूल्स’ (KIFS) और ‘खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय’ (KIUV) के माध्यम से स्कूली स्तर से ही आधुनिक ट्रेनिंग को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा।
- प्रतिभाओं का दायरा बढ़ाना: ‘इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स’ (E-KIA) श्रेणी के तहत देश में एथलीटों के आधार (talent pool) को 10 गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
- तकनीक और उच्च प्रदर्शन: युवा खिलाड़ियों को खेल विज्ञान (Sports Science), एआई-आधारित विश्लेषण और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कोच उपलब्ध कराए जाएंगे।
2030 राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक दावेदारी की नींव
यह नया बजट ढांचा केवल तात्कालिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के बड़े वैश्विक मंचों के लिए भारत की तैयारी का खाका प्रस्तुत करता है।
यह विस्तारित योजना 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों (CWG 2030) में भारत के शानदार प्रदर्शन की नींव रखने के साथ-साथ, भविष्य में ओलंपिक और पैरालिंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत की मजबूत दावेदारी का आधार बनेगी।
निष्कर्ष
आगामी 5 वर्षों के लिए स्वीकृत ₹36,441 करोड़ का यह फंड भारतीय खेल जगत के लिए एक परिवर्तनकारी मोड़ साबित होगा। बुनियादी ढांचे के विकास, वैज्ञानिक कोचिंग और खिलाड़ियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता में बढ़ोतरी से भारत की खेल संस्कृति को एक नया आयाम मिलेगा, जो ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



