Thursday, February 12, 2026
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Chhattisgarh Gaudham Yojana: पशु संरक्षण, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाली ऐतिहासिक पहल

Chhattisgarh Gaudham Yojana: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई गौधाम योजना एक ऐसी ग्रामीण विकास पहल है, जिसका उद्देश्य सिर्फ गोवंश का संरक्षण नहीं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना भी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार, यह योजना प्रदेश में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और साथ ही चरवाहों, गौसेवकों और ग्रामीण परिवारों को स्थायी आय उपलब्ध कराएगी।
यह योजना पशुपालन, डेयरी, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था—चारों क्षेत्रों को आपस में जोड़कर एक मजबूत मॉडल तैयार करती है।

1. गौधाम योजना क्या है?
गौधाम योजना के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में गौधाम (सुव्यवस्थित गो-आश्रय स्थल) विकसित किए जाते हैं।

इन गौधामों में—

  • परित्यक्त एवं छुट्टा पशुओं को सुरक्षित स्थान
  • पशुओं के लिए चारा, पानी, देखभाल की व्यवस्था
  • गोबर, गौमूत्र और जैविक खाद के उत्पादन का केंद्र
  • ग्रामीणों को रोजगार प्राप्त करने के अवसर

इस तरह यह योजना पशु-आश्रय केंद्रों को आर्थिक उत्पादन गतिविधियों का हब बनाने का काम करती है।


2. Chhattisgarh Gaudham Yojana:योजना की प्रमुख विशेषताएँ

✓ पशुओं की सुरक्षा और देखभाल

  • छुट्टा या परित्यक्त पशु किसानों की फसलें नष्ट करते थे—अब उन्हें सुरक्षित आश्रय मिलता है।
  • गौधाम में चिकित्सा सुविधा, टीकाकरण और भोजन की व्यवस्था की जाती है।

✓ रोजगार के अवसर

  • चरवाहों, गौसेवकों और ग्रामीण युवाओं को नियमित मानदेय।
  • गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर कमाई।
  • गौमूत्र से जैविक उत्पादों का निर्माण।
  • दूध उत्पादन बढ़ने पर डेयरी व्यवसाय में नए अवसर।

✓ किसानों के लिए लाभ

  • जैविक खाद से रासायनिक उर्वरक पर खर्च घटता है।
  • खेत की उर्वरता बढ़ती है।
  • अधिक दूध देने वाली नस्लें विकसित होने से किसानों की आय बढ़ती है।

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3. पशुओं की नस्ल सुधार का बड़ा लक्ष्य

योजना के अंतर्गत पशुओं के नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें शामिल हैं—

  • वैज्ञानिक तरीकों से कृत्रिम गर्भाधान
  • उन्नत नस्लों का संरक्षण
  • पोषक आहार और बेहतर देखभाल
  • पशु चिकित्सकों द्वारा नियमित जांच

इससे दूध और डेयरी उत्पादों का उत्पादन तेजी से बढ़ सकता है।


4. जैविक खेती को बढ़ावा

योजना का एक बड़ा लाभ यह है कि इससे जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलता है।
गौधाम में तैयार होता है—

  • वर्मी कम्पोस्ट
  • जैविक खाद
  • गौमूत्र आधारित जीवामृत

इनसे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और किसानों का खर्च कम होता है।


5. ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव

गौधाम योजना गांवों में रोजगार, उत्पादन और स्थानीय व्यवसाय को बढ़ावा देती है—

  • समूह आधारित उत्पादन (महिला समूह, किसान समूह)
  • स्थानीय बाजारों में खाद और डेयरी उत्पादों की बिक्री
  • छोटे ग्रामीण उद्योग जैसे—दीपक, धूपबत्ती, फिनाइल आदि का निर्माण
  • गांवों में पशुपालन का विस्तार

इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायी वित्तीय चक्र बनता है।


6. सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव

  • पशु संरक्षण भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • गांवों की स्वच्छता और व्यवस्था में सुधार होता है।
  • छुट्टा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाएँ कम होती हैं।
  • पर्यावरण को जैविक उत्पादों से लाभ मिलता है।

छत्तीसगढ़ गौधाम योजना – मासिक भुगतान विवरण

भूमिका / पदमासिक मानदेय (₹)विवरण
चरवाहा (Cowherd)₹ 10,916 प्रति माहगौधाम में पशुओं की देखभाल, चराने, चारा-पानी की व्यवस्था आदि कार्य
गौसेवक (Cattle Attendant / Sevak)₹ 13,126 प्रति माहपशुओं की स्वास्थ्य देखभाल, साफ-सफाई, प्रबंधन एवं गौधाम संचालन में सहयोग

💡 योजना से संबंधित अन्य लाभ

1. स्थायी रोजगार

  • ग्रामीण युवाओं, चरवाहों और गौसेवकों को नियमित मासिक आय
  • महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर (जैविक खाद, गोबर उत्पाद इत्यादि)

2. अतिरिक्त आय (ग्राम समितियों/SHG के माध्यम से)

  • गोबर बिकवाली
  • वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन
  • गौमूत्र आधारित जैविक उत्पाद
  • गोबर से दीया, धूपबत्ती, ब्रिकेट आदि

3. पशुपालन और खेती दोनों को लाभ

  • दूध उत्पादन बढ़ना
  • नस्ल सुधार से बेहतर आय
  • जैविक खाद मिलने से किसानों का खर्च कम

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ गौधाम योजना एक ऐसी दूरदर्शी योजना है, जो गोवंश संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़ती है। यह न केवल पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि ग्रामीण परिवारों को रोजगार, किसानों को जैविक खेती में सहायता और गांवों को स्वावलंबी बनाने का मार्ग भी खोलती है।

यह योजना आने वाले समय में न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए ग्रामीण विकास का मॉडल बन सकती है।

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