नई दिल्ली: देश के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना को अगले कई वर्षों तक जारी रखने को हरी झंडी दे दी गई है।
सरकार के इस फैसले से साफ हो गया है कि देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों को आने वाले वर्षों में भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें हर साल मिलने वाली वित्तीय मदद निर्बाध रूप से मिलती रहेगी।
2030-31 तक जारी रहेगी योजना: 3.15 लाख करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत
कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार:
- PM-Kisan योजना का विस्तार वर्ष 2026-27 से बढ़ाकर 2030-31 तक कर दिया गया है।
- इस अवधि के लिए सरकार ने 3.15 लाख करोड़ रुपये के विशाल वित्तीय आवंटन (Financial Allocation) को मंजूरी दी है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस कदम से यह स्पष्ट है कि सरकार का पूरा ध्यान कृषि सुधारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने पर केंद्रित है।
“किसानों की समृद्धि ही राष्ट्र की समृद्धि की नींव है”
बैठक के दौरान सरकार ने दोहराया कि “किसानों की समृद्धि ही राष्ट्र की समृद्धि की नींव है।”
कृषि गतिविधियों के लिए समय पर खाद, बीज और अन्य आवश्यक संसाधनों की खरीदारी के लिए किसानों को नकद सहायता की आवश्यकता होती है। पीएम किसान योजना के माध्यम से मिलने वाली यह राशि किसानों को साहूकारों और महंगे ब्याज दरों से बचाती है।
PM Kisan Yojana क्या है और कैसे मिलता है लाभ?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत फरवरी 2019 में की गई थी। इस योजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- वार्षिक आर्थिक सहायता: पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं।
- तीन किस्तों में भुगतान: यह राशि 2,000-2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में दी जाती है।
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT): पूरी राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे किसान के बैंक खाते में जमा की जाती है।
- आधार-आधारित प्रमाणीकरण: फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधार लिंक सत्यापन और डिजिटल वेरिफिकेशन को अनिवार्य बनाया गया है।
पारदर्शी प्रणाली और DBT से बदला परिदृश्य
पीएम-किसान योजना की सबसे बड़ी सफलता इसकी पारदर्शिता (Transparency) रही है। डिजिटल सत्यापन और आधार-आधारित डीबीटी व्यवस्था के चलते यह सुनिश्चित हुआ है कि योजना का लाभ केवल असली और पात्र भूमिधारक किसानों तक ही पहुंचे।
इससे न केवल सरकारी खजाने का दुरुपयोग रुका है, बल्कि किसानों का भरोसा भी डिजिटल गवर्नेंस पर बढ़ा है।
निष्कर्ष
2030-31 तक योजना के विस्तार और 3.15 लाख करोड़ रुपये के भारी बजट आवंटन से स्पष्ट है कि मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में किसान सबसे ऊपर हैं। यह फैसला न केवल किसानों की आय को सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि ग्रामीण भारत के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगा।



